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झा जी, भई वाह जी !!!!

Posted On: 11 Apr, 2012 मस्ती मालगाड़ी में

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संसार में ऐसा कोई भी प्रश्न नहीं है जिसका उत्तर मेरे मित्र झा जी के पास नहीं होता और सभी मित्रो की समस्याओ का समाधान भी वह बड़े प्रेमपूर्वक करते है,पर ज़रा कवी ह्रदय है इसलिए थोड़ी सरहाना की भूख है। मेरे मन में भी एक प्रश्न कुछ दिनों से कुलबुला रहा था तो सोचा चलो झा जी से इसका उत्तर प्राप्त करे …….

..
अपने प्रश्नों की पोटली लिए
मैं पंहुचा झा जी के द्वार
मुझे देख झा जी मुस्काए
बोले कैसे आना हुआ यार
आज बड़े दिनों बाद आये हो
ज़रूर कोई प्रश्न लाये हो
मैं बोला प्रभु आप तो सब जानते है
हम आप ही को ब्रह्म मानते है
ज़रा एक शंका का समाधान बताइए
ह्रदय से अज्ञान के जाले हटाइए
झा जी मुस्काए, बोले वत्स क्या जानना चाहते हो ??
क्या चलती है सत्ता में बाते बता दूं ??
स्विस बैंक में है किसके खाते बता दूं ??
मैं बोला भगवन ! यह बाते अपनी समझ से परे है
हम सिक्के है खोटे, आप डॉलर खरे है
इन व्यर्थ की बातो में हम नहीं पड़ते है
आप यह बताइए पति-पत्नी क्यों लड़ते है ??
झा जी हँसे बोले प्रश्न तो इंट्रेस्टिंग लाये हो
लगता है पत्नी से मार खा कर आये हो
खैर,इसका उत्तर मैं तुम्हे बताता हूँ
विषय कठिन है उदहारण से समझाता हूँ
एक दिन तुम्हारी भाभी को हम पर प्रेम आया
बड़े प्रेम से हमे आपनी गोद में लेटाया
और बोली सच बताना प्रिय कैसा लग रहा है ??
हमे लगा हमारे अन्दर उपमाओ का सागर जग रहा है
उतावली होकर वो बोली बताइए न कहाँ खोये है ?
मैंने कहा प्रिय लगता है बैकुंठ में विष्णु शेष शैय्या पर सोये है
यह सुनते ही उनकी भृकुटी तन गयी
इक पल में लक्ष्मी दुर्गा बन गयी
इससे आगे हम नहीं बताएँगे
पर्सनल मैटर है भाई सब जान जायेंगे
अब तुम्हारे प्रश्न में आते है, उसका उत्तर बताते है
जब पत्नी कहती है प्रिय सच बोलना
अपना मुंह कभी मत खोलना
पत्नियों को सच तनिक न भाता है
यह गाँधी अस्त्र बस मुसीबत लाता है
सत्यमार्ग में सर मुंडाते ही ओले पड़ते है
इसीलिए पति -पत्नी लड़ते है
झा जी का उत्तर सुन मन गदगद हो आया
रुंधे हुए कंठ से बस इतना ही कह पाया
झा जी, भई वाह जी !!!

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Liliam के द्वारा
November 5, 2016

Ahh..really nice points dude. Simply I’m proud to be a blogger. Well I’m not a pro-blogger but BLOGGER defines me really well I think. Happy BlahAing!gsgwoni Ahlawat recently posted..

krishnashri के द्वारा
April 13, 2012

स्नेही अभी जी , इस मंच पर सच्चे हास्य की कमी थी वह आपने पूरी कर दी .बिना किसी लाग लपेट के वाह भाई वाह .

    abodhbaalak के द्वारा
    April 13, 2012

    :) हास्य और व्यबंग का सुन्दर मिश्र भाई मेरे ऐसे ही लिखते रहो http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    abhii के द्वारा
    April 13, 2012

    अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद्

alkargupta1 के द्वारा
April 12, 2012

बहुत ही बढ़िया हास्य रचना की प्रस्तुति के लिए वाह….वाह…बहुत बढ़िया……!!!!

    abhii के द्वारा
    April 13, 2012

    धन्यवाद्

चन्दन राय के द्वारा
April 12, 2012

अभि जी! मित्र हास्य कविता ने आखिर के शब्दों तक आते आते हंसा के ही छोड़ा , मतलब आपकी रचना ने असर छोड़ा , आपकी इस कविता को मेरा नमन

    abhii के द्वारा
    April 13, 2012

    ज़र्रा नवाज़ी के लिए शुक्रिया

चन्दन राय के द्वारा
April 12, 2012

अभि जी! मित्र व्यंग कविता ने आखिर के शब्दों तक आते आते हंसा के ही छोड़ा , मतलब आपकी रचना ने असर छोड़ा , आपकी इस कविता को मेरा नमन

nishamittal के द्वारा
April 12, 2012

इतनी रोचक रचना प्रस्तुत करने पर हम आपको भी वाह भई वाह कहेंगें,

    abhii के द्वारा
    April 13, 2012

    आपकी ऐसी ही प्रतिक्रियाये और लिखने को प्रेरित करती है

dineshaastik के द्वारा
April 12, 2012

वाह जी वाह…..कमाल  की हास्य रचना, अभी जी बहुत बहुत बधाई…..

    abhii के द्वारा
    April 13, 2012

    सरहना के लिए धन्यवाद्

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 11, 2012

अभी जी, हमारा भी मन गद-गद हो गया….

    abhii के द्वारा
    April 13, 2012

    आप प्रसन्न हुए यह जानकार मुझे भी बहुत प्रसन्नता हुई

ashishgonda के द्वारा
April 11, 2012

अभि जी! मैंने अभी-अभी आपको पढ़ा, आपका जवाब नहीं बहुत खूबसूरत व्यंग,,,,,,कृपया मेरा भी ब्लॉग पढ़ें— http://ashishgonda.jagranjunction.com/

    abhii के द्वारा
    April 13, 2012

    धन्यवाद् आशीष जी

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 11, 2012

अभि जी , भई वाह जी ! :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    abhii के द्वारा
    April 11, 2012

    धन्यवाद् जी

    shashibhushan1959 के द्वारा
    April 11, 2012

    आदरणीय अभी जी, सादर ! इस ताजगी भरी रचना पर मेरी डबल वाह !!!


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