abhi

Just another weblog

13 Posts

112 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 10352 postid : 51

मोह का बंधन.....

Posted On: 10 Apr, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अपने एक पुराने ब्लॉग “याज्ञवल्क्य का उपदेश” के माध्यम से ऋषि याज्ञवल्क्य के कथनों द्वारा मोह के विषय में तो हम थोडा बहुत जान गए थे कि मोह किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति स्वार्थपूर्ति निमित्त एक जुडाव है परन्तु इस जुडाव इस आसत्क्ति से बचा कैसे जाए ???
इसके लिए एक उदहारण लेते है कि माना आपके किसी मित्र ने एक सुन्दर भवन का निर्माण कराया पर किसी कारणवश वह अभी उसमे रह नहीं सकता इसलिए वह आपको वो भवन रहने के लिए दे देता है और आप भी भवन पाकर प्रसन्न है, समय बीतने के साथ उस घर से आपकी यादे जुड़ जाती है और उसके प्रति आपकी आसक्ति भी बढ जाती है । कुछ समय बाद आपका मित्र लौटकर आता है और अपने घर कि वापस मांग करता है तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी ? या तो आप प्रसन्नतापूर्वक उसकी धरोहर उसे लौटा देंगे या उसे घर वापस करने से मुकर जायेंगे, पर भई घर तो उसी का है वह बलपूर्वक भी इसे लेकर ही रहेगा। पहली स्थिति में आप प्रसन्न है क्योकि आप धरोहर को उसके स्वामी को लौटाकर भारमुक्त हो गए है परन्तु दूसरी स्थिति में आपके ह्रदय में दुःख का सागर उमड़ रहा होगा वह वस्तु जो आपको प्रिय थी जिस पर आप अपना अधिकार समझने लगे थे वह आपसे बलपूर्वक छीन ली गयी ।
ऐसी कई परिस्थियों से हमें कई बार अपने जीवन में दो-चार होना पड़ता है बस वहां घर के स्थान पर होते है हमारे प्रियजन, हमारी धन-सम्पत्ति और मित्र कि जगह होता है इश्वर । इश्वर ही इस पूरी सृष्टी का स्वामी है हमारे माता- पिता भाई-बहन, भार्या, पुत्र, पौत्र, मित्र सब उसी के बनाये है हमारे द्वारा अर्जित संपत्ति भी हमारे पास उसकी धरोहर है तब इन सब से अलग होने का इतना दुःख इतना शोक क्यों ?? फारसी कवि उर्फी ने लिखा है – “अगर रोने से प्रियतम मिल जाता है तो इस आशा में सौ वर्षा तक रोया जा सकता है” इसलिए अगर हम प्रसन्नतापूर्वक यह स्वीकार करने का प्रयास करे कि हमारे पास रखी धरोहर अपने स्वामी के पास पहुँच गयी है तो मोह्जन्य विषाद से बचा जा सकता है ।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

7 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Laicee के द्वारा
November 5, 2016

it was an actual politician of some sort. If the Boy Wizards are contenders then I’d say they were pretty serious ones.Dr Cat, you are right – Oakes says it is a “senior government source”, and implies it is a Cabinet Minister, as does Hartcher (who apparently has sources other than Oakes’ inr)smantro.Jofdan and his crew are no longer employed by the government; their employment was terminated when KRudd lost the top job.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 11, 2012

भाई , आप ने इस आलेख के माध्यम से ( धर्मार्थ- काम-मोक्षानाम त्रयः विश्रांति हेतवः ) की याद दिला दी | बहुत-बहुत बधाई !!

    abhii के द्वारा
    April 11, 2012

    धयवाद आचार्य जी

dineshaastik के द्वारा
April 11, 2012

मोह  ही दुख  का कारण  है, मोह को सटीक  शब्दों में परिभाषित  करता हुआ आलेख, अपने उद्देश्य  में आलेख  पूर्णतः सफल…

    abhii के द्वारा
    April 11, 2012

    सराहना के लिए धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
April 10, 2012

इतनी समझदारी जिस दिन हमलोगों के अन्दर आ जायेगी न रहेगा, मोह न रहेगा क्लेश, न होगी आपसी वैभ्नास्यता! उत्तम विचार प्रस्तुत करने हेतु आपका साधुवाद!

    abhii के द्वारा
    April 11, 2012

    प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran