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सुनो भई साधो!!!

Posted On: 8 Apr, 2012 में

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नाम वो ही कर गए जो हुए बदनाम,
कल के कल्लू चोर आज नेता कालूराम

.

.

.


सबकुछ अपना ले गए इंग्लिश साहेब – मेम,
बचाकुचा ले जाएँगे आगे अंकल सैम

.

.

.

लोकतंत्र की देश में उखड रही है सांस,
ओढ़ शेर की खाल को गधे चर रहे घास

.

.

.

(सत्ता बदलने पर) करवाते वो जाँच करपसून नई कुर्सी में बैठ,
नेताजी की बोली में इसको कहते टिट फॉर टेट

.

.

.

राह चलत नेताजी को मिला चराग़े जिन
शक्तिमान नेताजी ने उसकी कर दी विश पूरी तीन

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

gopalkdas के द्वारा
April 11, 2012

Wah

    abhii के द्वारा
    April 11, 2012

    धन्यवाद् मित्र

dineshaastik के द्वारा
April 9, 2012

सुन्दर कबीर वाणी….

    abhii के द्वारा
    April 9, 2012

    सराहना के लिए धन्यवाद् मान्यवर

Ankur के द्वारा
April 8, 2012

अभी जी, आपके चिंतन की दाद दूंगा. परन्तु ये दोहे तो नहीं है. क्षणिकाएं हो सकती है. अच्छा लिखा है आपने. एक दोहा देखिये. गल्ला महंगा हो गया, घर में पड़ा अकाल / बिलख रहा है भूख से, भूखी माँ का लाल // “अंकुर” http://www.hnif.jagranjunction.com

    abhii के द्वारा
    April 8, 2012

    इनको आप हंसिकाय भी कह सकते है

nishamittal के द्वारा
April 8, 2012

कहत अभी सुनो भई साधो अच्छा लगा

    abhii के द्वारा
    April 8, 2012

    धन्यवाद्


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